Friday, September 14, 2018

तस्वीरों में: मुहर्रम के लिए इंदौर पहुँचे दाउदी बोहरा समाज के लाखों लोग

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंदौर में मुहर्रम के मौक़े पर होने वाले दाउदी बोहरा समाज के ख़ास आयोजन 'अशरा मुबारका' में शिरकत करने वाले हैं.
इस मौक़े पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद होंगे.
दाऊदी बोहरा समाज के सर्वोच्च धार्मिक नेता सैय्यदना मुफ़ज़्ज़ल सैफ़ुद्दीन से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुलाक़ात करेंगे.
सैय्यदना इन दिनों इंदौर में रह रहे हैं. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, मोहर्रम के पहले दस दिनों को पूरी दुनिया के मुसलमान इस्लाम के आख़िरी पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मनाते हैं.
ऐसा माना जा रहा है कि पूरी दुनिया से क़रीब दो लाख दाऊदी बोहरा मुसलमान इस समय इंदौर में हैं.
सैय्यदना इंदौर के सैफ़ी नगर स्थित बोहरा मस्जिद में ठहरे हुए हैं.
कहा जा रहा है कि मोदी उनसे वहीं मुलाक़ात करेंगे. उम्मीद है कि मोदी यहाँ जमा दाऊदी बोहरा लोगों को संबोधित भी करेंगे.
इससे पहले जब पिछले गुरुवार यानी 6 सितंबर को सैय्यदना इंदौर पहुँचे तो लोकसभा स्पीकर और इंदौर की सांसद सुमित्रा महाजन ने उनका स्वागत किया था.
ज़िला प्रशासन मोदी के दौरे के बारे में कोई भी आधिकारिक जानकारी देने से कतरा रहा है लेकिन पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.
पुलिस के मुताबिक़, क़रीब 4,000 सुरक्षाकर्मी शहर में तैनात किए गये हैं.दौर में इसके लिए क़रीब 40 देशों के ढाई लाख लोग आये हैं जो इंदौर की 13 मस्जिदों, बगीचों, मैदान आदि स्थलों पर जुटे हैं.
आयोजन की व्यवस्था की ज़िम्मेदारी तीन हज़ार बुरहानी गार्ड्स को दी गई है.
बोहरा समुदाय का एक समूह, जो दाऊदी बोहरा कहलाता है, इस्माइली शिया फ़िक़ह को मानता है और इसी विश्वास पर क़ायम है.
अंतर ये है कि दाऊदी बोहरा 21 इमामों को मानते हैं.
उनके अंतिम इमाम तैयब अबुल क़ासिम थे जिसके बाद आध्यात्मिक गुरुओं की परंपरा है.
इन्हें दाई कहा जाता है और इस तुलना से 52वें दाई सैय्यदना बुरहानुद्दीन रब्बानी थे. साल 2014 में रब्बानी के निधन के बाद से उनके दो बेटों में उत्तराधिकार का झगड़ा हो गया और अब मामला अदालत में है.
बोहरा भारत के पश्चिमी क्षेत्र ख़ासकर गुजरात और महाराष्ट्र में पाए जाते हैं जबकि पाकिस्तान और यमन में भी ये मौजूद हैं.
यह एक सफल व्यापारी समुदाय है जिसका एक धड़ा सुन्नी भी है.
बड़े पैमाने पर या संप्रदाय के आधार पर देखा जाये तो मुसलमानों को दो हिस्सों-सुन्नी और शिया में बांटा जा सकता है.
हालांकि शिया और सुन्नी भी कई फ़िरक़ों या पंथों में बंटे हुए हैं.
बात अगर शिया-सुन्नी की करें तो दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि अल्लाह एक है, मोहम्मद साहब उनके दूत हैं और क़ुरान आसमानी किताब यानी अल्लाह की भेजी हुई किताब है.
लेकिन दोनों समुदाय में विश्वासों और पैग़म्बर मोहम्मद की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी के मुद्दे पर गंभीर मतभेद हैं.
इन दोनों के इस्लामिक क़ानून भी अलग-अलग हैं.

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